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उत्तराखंड मौसम अपडेट : चार जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी, अभी भी कई मुख्य मार्ग बंद


उत्तराखंड मौसम अपडेट : चार जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी, अभी भी कई मुख्य मार्ग बंद
उत्तराखंड में सोमवार देर रात को मौसम ने करवट बदली और कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई। राजधानी देहरादून में भी मंगलवार की सुबह बारिश के साथ हुई। वहीं, कई जिलों में बादल छाए हैं।  

उधर, मौसम के बदले मिजाज के चलते अगले 24 घंटे में नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी कर दिया है। 

मौसम विभाग के मुताबिक राजधानी देहरादून के अलावा हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल, उधमसिंहनगर, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में तेज बौछार और गर्जना के साथ बिजली गिरने की भी संभावना है। दून में अगले 24 घंटों में एक या दो दौर की भारी बारिश की संभावना है। 


ज्योलीकोट कर्णप्रयाग हाईवे पर यातायात सुचारू 
चार दिन बाद ज्योलीकोट कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर वीरभट्टी पर आए मलबे को साफ कर यातायात के लायक बना दिया गया है। हालांकि अभी बड़ी मात्रा में मलबा वहीं पड़ा हुआ है। उक्त स्थल पर रैंप बनाकर यातायात सुचारू किया गया है। बता दें कि उक्त हाइवे शुक्रवार से बलियानाला की पहाड़ी खिसकने से बंद था।


मलारी हाईवे 11वें दिन भी बंद, मलबा हटाने में जुटी बीआरओ की टीम
चीन सीमा को जोड़ने वाला जोशीमठ-मलारी हाईवे तमक गांव के समीप मंगलवार को 11वें दिन भी सुचारू नहीं हो पाया। प्रशासन ने नीती घाटी के जरूरतमंद ग्रामीणों के लिए क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू कर दी है।

सोमवार को पहले दिन हेलीकॉप्टर ने छह राउंड में 24 ग्रामीणों को रेस्क्यू कर गंतव्य तक पहुंचाया। बीआरओ की ओर से भूस्खलन क्षेत्र के 500 मीटर हिस्से में से करीब 250 मीटर तक मलबा हटा दिया गया है। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के 18 जवानों की ओर से समीपवर्ती गांवों के ग्रामीणों की पैदल आवाजाही करवाई जा रही है।

टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे बंद
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन के कारण सोमवार से पूरी तरह बंद है। सोमवार को हाईवे पर मलबे में भारी पत्थरों के साथ पांच पेड़ भी जमींदोज हो गए थे। हाईवे के मंगलवार दोपहर तक खुलने के आसार हैं।

एनएच पर दिल्ली, देहरादून सहित मैदानी क्षेत्रों से आने वाली रोडवेज की पांच बसें फंसी रहीं। बाद में इन बसों को वापस भेज दिया गया, जबकि मैदानी क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों को रूट बदलकर देवीधुरा और सूखीढांग-डांडा-मीनार (एसडीएम) मार्ग से भेजा गया है।
   

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