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उत्तराखंड : राजनैतिक उठापटक के दौरान अगर त्रिवेंद्र हटे तो कौन होगा अगला सीएम.. ? एक रिपोर्ट..

उत्तराखंड : राजनैतिक उठापटक के दौरान अगर त्रिवेंद्र हटे तो कौन होगा अगला सीएम.. ? एक रिपोर्ट.. 
देहरादून : उत्तराखंड में इस समय सीएम कुर्सी  को लेकर हलचल तेज हो गई है। ऑब्जर्वर्स की रिपोर्ट के बाद सीएम त्रिवेंद सिंह रावत दिल्ली तलब किए गए। यहां आलाकमान के सामने रावत ने पक्ष रखा है। इस बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि सीएम रावत हट सकते हैं। उनकी जगह इस रेस में कई नाम चल रहे हैं। खास तौर पर अजय भट्ट, अनिल बलूनी और सतपाल महाराज का नाम आगे बताया जा रहा है। पहले भी 4 साल के दौरान कई बार मुख्यमंत्री रावत के हटने की चर्चा हुई। लेकिन उनकी कुर्सी बरकरार रही। आइए रेस में आगे तीन नामों पर नजर डालते हैं।

अजय भट्ट
सबसे पहले बात करते हैं अजय भट्ट की। अजय भट्ट अभी नैनीताल-उधमनगर सीट से लोकसभा सांसद हैं। मूल रूप से हल्द्वानी के निवासी अजय भट्ट शुरुआत से ही बीजेपी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। बता दें कि अजय भट्ट का परिवार भी जनसंघ से जुड़ा रहा है। भट्ट ने पहली बार 1980 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ली थी। इसके बाद 1985 में भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े। 2012 से 2017 के दौरान वह विधानसभा में नेता विपक्ष थे। बीजेपी की सरकार में वह कई विभागों के मंत्री रहे हैं। इसके साथ ही 2015 में उन्हें उत्तराखंड बीजेपी की कमान सौंपी गई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में उनका नारा सबकी एक ही रट...अजय भट्ट...अजय भट्ट काफी चर्चा में रहा था।


अनिल बलूनी
इस रेस में एक और नाम आगे चल रहा है। ये नाम है राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का। इस समय वह बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। पार्टी आलाकमान के खास माने जाते हैं। इसके साथ ही पार्टी के दिग्गज नेता दिवंगत अरुण जेटली और रवि शंकर प्रसाद के बाद बलूनी पार्टी के ऐसे नेता हैं, जिनको राष्ट्रीय संगठन के मीडिया प्रमुख के साथ-साथ मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अगर उनके नाम को हरी झंडी मिलती है तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।

सतपाल महाराज

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की उत्तराखंड में काफी अच्छी पकड़ है। कांग्रेस से राजनीति की शुरुआत की। देवगौड़ा और गुजराल सरकार में वह केंद्रीय राज्यमंत्री रहे। अब तक उनका सीएम बनने का सपना अधूरा है। 2009 में गढ़वाल सीट से सांसद बने थे। 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे। 2017 में चौबट्टाखाल सीट से विधायक होने के साथ ही वह त्रिवेंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। राजनीतिक हस्ती के साथ-साथ वह आध्यात्मिक गुरु भी हैं। अध्यात्म के क्षेत्र में अपने पिता हंस जी महाराज की विरासत को उन्होंने आगे बढ़ाया। आज भी देश के अलग-अलग राज्यों जैसे गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम और यूपी में महाराज के फॉलोअर मौजूद हैं। ऐसे में उन्हें भी रेस में आगे बताया जा रहा है। 

गैरसैण में बैठक, नेतृत्व बदलने की सुगबुगाहट
शनिवार को गैरसैण बजट सत्र के दौरान देहरादून में बीजापुर गेस्ट हाउस में एक बड़ी बैठक आयोजित हुई। यह बैठक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम ने बुलाई थी। इसके बाद से प्रदेश नेतृत्व के बदलने की संभावना तेज हो गई थी। बैठक समाप्त होने के बाद प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों को खारिज किया और इस बैठक को रूटीन बैठक बताया।


सोमवार को गैरसैण में महिला दिवस के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम थे। जिसमें उन्होंने जाना सुनिश्चित किया हुआ था। लेकिन आनन-फानन में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत फिर से दिल्ली रवाना हो गये। जिसके बाद सियासी पारा फिर से चढ़ गया। अगर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत आने वाले साल में मुख्यमंत्री पद पर बने रह गए तो इतिहास रचेंगे। उत्तराखंड में दिवंगत नारायण दत्त तिवारी के बाद वह दूसरे मुख्यमंत्री होंगे जो पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाएंगे।

ND तिवारी एकमात्र CM जिन्होंने पूरा किया अपना कार्यकाल

उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री और कार्यकाल 
नित्यानन्द स्वामी--9 नवंबर 2000 से 29 अक्टूबर 2001 तक
भगत सिंह कोश्यारी--30 अक्टूबर 2001 से एक मार्च 2002 तक
नारायण दत्त तिवारी--2002 से 2007 तक 

भुवन चन्द्र खंडूड़ी--8 मार्च 2007 से 27 जून, 2009
रमेश पोखरियाल निशंक--27 जून 2009 से 11 सितंबर 2011
भुवन चन्द्र खंडूड़ी--11 सितंबर 2011 से 2012 तक (एक कार्यकाल में दूसरी बार)
विजय बहुगुणा--2012 से 2014
हरीश रावत--फरवरी 2014 से 2017 तक
त्रिवेंद्र सिंह रावत--18 मार्च 2017 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की (वर्तमान में उत्‍तराखंड के सीएम)


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