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किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट की सरकार को दो टुक ,कानून को होल्ड करें वरना हम लगाएंगे रोक

बडी खबर :किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट की सरकार को दो टुक ,कानून को होल्ड करें वरना हम लगाएंगे रोक
किसान आंदोलन और कृषि कानूनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने सरकार की किसानों के साथ बातचीत के प्रोग्रेस पर सवाल उठाए हैं. सीजेआई ने कहा कि मौजूदा हालत पर हम बहुत परेशान हैं. कितने राज्य के लोग सरकार के खिलाफ खड़े हुए है. ये कैसी वार्ता चल रही है
सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि दोनों पक्षों में हाल ही में मुलाकात हुई, जिसमें तय हुआ है कि चर्चा चलती रहेगी. 
चीफ जस्टिस ने कहा कि जिस तरह से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे खुश नहीं हैं. हमें नहीं पता कि आपने कानून पास करने से पहले क्या किया. पिछली सुनवाई में भी बातचीत के बारे में कहा गया, क्या हो रहा है?
याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सिर्फ कानून के विवादित हिस्सों पर रोक लगाइए. लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि नहीं हम पूरे कानून पर रोक लगाएंगे.

 कानून पर रोक लगने के बाद भी संगठन चाहें तो आंदोलन जारी रख सकते हैं, लेकिन हम जानना चाहते हैं कि क्या इसके बाद संगठन नागरिकों के लिए रास्ता छोड़ेंगे  ? 


चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कानून वापसी की बात नहीं कर रहे हैं, हम ये पूछ रहे हैं कि आप इसे कैसे संभाल रहे हैं. हम ये नहीं सुनना चाहते हैं कि ये मामला कोर्ट में ही हल हो या नहीं हो. हम बस यही चाहते हैं कि क्या आप इस मामले को बातचीत से सुलझा सकते हैं. 


सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि हमें नहीं पता कि महिलाओं और बुजुर्गों को वहां क्यों रोका जा रहा है, इतनी ठंड में ऐसा क्यों हो रहा है. हम एक्सपर्ट कमेटी बनाना चाहते हैं, तबतक सरकार इन कानूनों को रोके वरना हम एक्शन लेंगे.


चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे पास ऐसी एक भी दलील नहीं आई जिसमें इस कानून की तारीफ हुई हो. अदालत ने कहा कि हम किसान मामले के एक्सपर्ट नहीं हैं, लेकिन क्या आप इन कानूनों को रोकेंगे या हम कदम उठाएं. हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं, लोग मर रहे हैं और ठंड में बैठे हैं. वहां खाने, पानी का कौन ख्याल रख रहा है?
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया है कि सभी पक्षों में बातचीत जारी रखने पर सहमति है. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम बहुत निराश हैं. पता नहीं सरकार कैसे मसले को डील कर रही गया? किससे चर्चा किया कानून बनाने से पहले? कई बार से कह रहे हैं कि बात हो रही है। क्या बात हो रही है?
सीजेआई बोबडे ने सरकार को दो टूक कह दिया -'हम अपने हाथों पर खून नहीं चाहते, सरकार कृषि कानून रोकें वरना हम खुद रोक देंगे. 






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