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आफत की बारिश :11 हाईवे, सहित 150 सड़कें ठप, जगह जगह फंसे यात्री, उफान पर भागीरथी

आफत की बारिश :11  हाईवे, सहित 150 सड़कें ठप, जगह जगह फंसे यात्री, उफान पर भागीरथी
देहरादून. उत्तराखंड में भारी बारिश से खतरों और मुसीबतों का दौर जारी है. खास तौर से पहाड़ों में नदियों, नालों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है. राज्य में कम से कम तीन राष्ट्रीय राजमार्गों, 11 स्टेट हाईवे समेत कम से कम 146 सड़कें व रास्ते बाधित हैं. चार धाम यात्रा पर निकले या लौट रहे श्रद्धालु रास्तों में जगह जगह फंसे हुए हैं क्योंकि बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे कई पॉइंट्स पर बंद हो गए हैं. साथ ही, चमोली जैसे पहाड़ी ज़िलों में मंगलवार रात से ज़ोरदार बारिश हो रही है.


चमोली ज़िले में देर रात मूसलाधार बारिश होने से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया. सबसे अधिक असर सड़कों पर देखने को मिल रहा है. बद्रीनाथ हाईवे की बात करें तो कर्णप्रयाग-उमट्टा के बीच सड़क पर मलबा आने के चलते हाईवे बन्द है. ऑलवेदर सड़क के काम में लगी दो मशीनें भी मलबे की चपेट में आ गई हैं. सम्पर्क मार्गों पर असर देखें तो जिलासू-गिरसा-आली मोटरमार्ग नागद के पास भारी मलबे से पटने के चलते तीन स्थानों पर सड़क बन्द है. हाईवे खोलने का काम चल तो रहा है, लेकिन खुलने में समय लग सकता है.


जगह-जगह ठप है बद्रीनाथ हाईवे
बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पागल नाला, खचड़ा नाला, छिनका और लंगासू जैस स्थानों पर बंद हो गया है. इन पॉइंट्स पर भारी पत्थर और बोल्डर रास्ते पर गिरे हैं, जिन्हें हटाया जा रहा है. कई जगहों पर बारिश थमी है, लेकिन रात भर से चार धाम यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं. जोशीमठ में रात से मूसलाधार बारिश आज 13 जुलाई की सुबह भी जारी रही. ज़िले भर में स्कूली बच्चों को भी खासी परेशानी हो रही है.


उत्तरकाशी में ये हैं हाईवे के हाल
यमुनोत्री हाईवे डाबरकोट के पास मलबा आने से बुधवार सुबह एक बार फिर बंद हो गया है. दोनों तरफ यात्री फंस गए हैं. वहीं गंगोत्री हाईवे लक्षेश्वर के पास मंगलवार की शाम ठप हुआ. यही नहीं, ज़िले में रात भर तेज़ बारिश होने से मंगलवार शाम से गंगोत्री धाम में बिजली सप्लाई भी ठप हो गई, जो आज दिन तक बहाल हो सकती है. मोरी प्रखंड में नैटवाड़ के पास बह गई 35 मीटर सड़क को ठीक किया गया. इधर, भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ गया है और पानी घाटों पर उछलकर बह रहा है.


बारिश के चलते रास्ते बेहद खतरनाक हो चुके हैं. कहीं पहाड़ों से भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, तो जगह जगह फिसलन का भी. मौसम, आपदा प्रबंधन व अन्य प्रशासनिक विभाग लगातार हिदायत दे रहे हैं कि यात्री बहुत सावधानी बरतें.

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