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उतराखंड में 21 सितंबर से खुलेगें कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूल , शासन ने जारी की एसओपी

उतराखंड में 21 सितंबर से खुलेगें कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूल , शासन ने जारी की एसओपी
देहरादून : प्रदेश में कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों को खोले जाने को लेकर शनिवार को उत्तराखंड शासन की ओर से एसओपी जारी कर दी गई है। जिसके मुताबिक एक से पांचवीं तक के स्कूल तीन घंटे के लिए चलेंगे। वहीं स्कूलों को खोले जाने से पहले सैनिटाइज किया जाएगा।

प्रदेश में कोविड की वजह से पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से बंद चल रहे कक्षा एक से पांचवीं तक के 14007 सरकारी और निजी स्कूल 21 सितंबर से खुल जाएंगे। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शुक्रवार को शिक्षा सचिव को इसके निर्देश दिए। मंत्री ने कहा है कि परिस्थितियां सामान्य हो गई हैं। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री से बात करने के बाद स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है। 
सरकार ने स्कूलों को सख्त हिदायत दी है कि स्कूल खुलने पर छात्रों से केवल ट़्यूशन फीस ही ली जाएगी। अन्य किसी भी गतिविधि का शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही स्कूलों में पाठ्यक्रम से इतर अन्य सभी गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। 

शिक्षा सचिव राधिका झा ने शनिवार को प्राथमिक स्कूलों के लिए एसओपी जारी की। उन्होंने कहा कि छात्रों को स्कूल आने के तीन दिन के भीतर अभिभावकों से सहमति पत्र स्कूल में जमा कराना होगा। जर्जर स्कूलों में पढाई कतई नहीं कराई जाएगी। हर जिले में सीईओ की जिम्मेदारी होगी कि कि संक्रमण पाए जाने पर तत्काल प्रशासन-स्वास्थ्य विभाग को सूचना हो जाए।  कोविड़ 19 सुरक्षा से जुड़े बाकी सभी मानक पूर्व में जारी एसओपी के अनुसार लागू रहेंगे।

घर से पढ़ने के इच्छुक छात्रों के लिए ऑनलाइन पढृाई के लिए शिक्षक अपने हिसाब समय तय कर सकते हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान ने स्कूल खोलने के फैसले को शिक्षा और छात्र हित में सही कदम बताया। चौहान ने कहा कि कोरोना काल मे शिक्षा को काफी नुकसान हुआ है। स्कूल खुलने से शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर से सुव्यवस्थित होगी। चौहान ने शिक्षकों से अपील की कि वो स्कूल बंदी से हुए नुकसान की भरपाई के दोगुनी मेहनत के साथ छात्रों को पढ़ाएं।

ज्ञात हो कि प्रदेश में कोविड संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कक्षा एक से 12वीं तक के स्कूलों को मार्च 2000 से बंद कर दिया गया था। स्कूलों को बंद किए जाने के बाद पहले माध्यमिक विद्यालयों को और इसके बाद जूनियर हाईस्कूलों को खोला गया था।
   

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