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किसान आंदोलन : किसानों के दुख से दुखी संत बाबा राम सिंह ने ख़ुद को मारी गोली , नोट में लिखा- जुल्म सहना भी पाप है

किसान आंदोलन : किसानों के दुख से दुखी संत बाबा राम सिंह ने ख़ुद को मारी गोली , नोट में लिखा- जुल्म सहना भी पाप है

दिल्ली में किसान आंदोलन चल रहा है. किसान दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर भी डटे हैं. यहीं किसानों के धरने में शामिल संत बाबा राम सिंह ने 16 दिसंबर, बुधवार को खुद को गोली मार ली. उनकी मौत हो गई है. बाबा राम सिंह करनाल के रहने वाले थे. हरियाणा की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी  से जुड़े थे. उनका एक सुसाइड नोट भी सामने आया है.

संत बाबा राम सिंह के इस कथित सुसाइड नोट में किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए किसानों के हक की बातें लिखी हैं. लिखा है कि किसानों के हक में और सरकारी जुल्म के विरोध में वो ये कदम उठा रहे हैं. इस नोट में ये भी लिखा है–

“किसानों का दुख देखा. अपने हक लेने के लिए सड़कों पर रो रहे हैं. बहुत दिल दुखा है. सरकार न्याय नहीं दे रही. जुल्म है, जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना भी पाप है.


किसी ने किसानों के हक में और जुल्म के खिलाफ कुछ नहीं किया. कइयों ने सम्मान वापस किए, पुरस्कार वापस किए, और रोष भी जताया.

दास किसानों के हक में सरकारी जुल्म के विरोध में आत्मदाह करता है. यह जुल्म के खिलाफ और किसानों के हक में आवाज है. वाहेगुरु जी का खालसा. वाहेगुरु जी की फतेह.”

आजतक के सतेंदर चौहान की रिपोर्ट के मुताबिक, संत बाबा राम सिंह ने लाइसेंसी हथियार से गोली चलाई. वह कई सिख संगठनों से भी जुड़े रहें हैं.

अब तक 21 किसानों की मौत हो चुकी 

बाबा राम सिंह के सुसाइड से पहले अब तक 21 किसान या तो दिल्ली के रास्ते में हादसों की भेंट चढ़ चुके हैं, या प्राकृतिक कारणों से उनकी मौत इस आंदोलन के दौरान हो चुकी है. बाबा राम सिंह से पहले होशियारपुर के किसान कुलविंदर सिंह की मौत हुई थी. दिल्ली के रास्ते में मंडी गोबिंदगढ़ के पास एक हादसे में उनकी जान चली गई.

बताते चलें कि कृषि कानूनों के विरोध में किसान 21 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं. किसान नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है. आंदोलन से जुड़े मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है. आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली की सीमा से हटाने की याचिका पर अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी किया है. ये भी कहा है कि किसान गुटों और सरकार के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाई जाए, जो गतिरोध दूर करने का प्रयास करे. 17 दिसंबर को इस पर आगे की सुनवाई होनी है.

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